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Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

4.5  

Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

जिंदगी से अतृप्त आत्माएं

जिंदगी से अतृप्त आत्माएं

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हमने देखा है जिंदगी में ऐसी अतृप्त आत्माओं को जो जीवंतहैं मगर जिंदगी से खुश नहीं उनको क्या कहेंगे अतृप्त  आत्मा ही कहेंगे ना।
जो जिंदगी में मिला है उससे ज्यादा की उम्मीद कर आज पड़ोस वालों को देख उसकी थाली में घी ज्यादा है मेरी थाली में कम क्यों? विचार कर असंतुष्ट हो जाते हैं उन आत्माओं को क्या कहेंगे अतृप्त आत्मा ही कहेंगे ना।
जो जिंदगी में मिला है उससे खुश न होकर जो नहीं मिला है उसकी, और दूसरे को ज्यादा मिला है तो उससे जलन करके अपने आप को परेशान करते हैं। उस आत्मा को क्या कहेंगे अतृप्त आत्मा ही कहेंगे ना।
इस विषय से हम हमेशा भूत प्रेत वाला तो नहीं लिख सकते हैं आज हम जिंदगी की सच्चाई लिख देते हैं बहुत से लोग उसी से अपनी जिंदगी से ही अतृप्त हो जाते हैं और अतृप्त आत्मा कहलाते हैं।
अपना मनपसंद न मिलना आत्मा को असंतुष्ट कर जाता है और अब तक अतृप्त आत्मा बना देता है।
इसीलिए कहती है विमला जो मिला है उसमें संतुष्ट हो जाओ। आस पड़ोस को देखकर के अपने दोस्तों की समृद्धि को देखकर अपना जी ना जलाओ।
और अपने आप को अतृप्त आत्मा ना बनाओ।
स्वरचित वैचारिक कविता



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