आत्मा निर्विकार अमर आत्मा संग दोष कैसे आया ? आत्मा निर्विकार अमर आत्मा संग दोष कैसे आया ?
शोक जगत को छोड़ उस पल, परमात्मा हो जाती है. शोक जगत को छोड़ उस पल, परमात्मा हो जाती है.
ख लूँ संजोकर वो लम्हा अपने भीतर जो सिर्फ़ मेरा अपना है, पर कौन देगा मुझे वो लम्हा ? ख लूँ संजोकर वो लम्हा अपने भीतर जो सिर्फ़ मेरा अपना है, पर कौन देगा मुझे वो लम्हा...
रास्ते तलाशते हुए शरीर सिर्फ और सिर्फ सुख भापते रास्ते तलाशते हुए शरीर सिर्फ और सिर्फ सुख भापते
श्राद्ध के दिनों में पूर्वजों को अपनी अतृप्त चाह पुरी करने के लिए आने का आहवान करती यह कविता... श्राद्ध के दिनों में पूर्वजों को अपनी अतृप्त चाह पुरी करने के लिए आने का आहवान क...
नाराज़गी जता कर क्यूँ न मुझसे आ मिले वो दिल मे रहते हुए भी दूरी, ये खूब कर लिया है नाराज़गी जता कर क्यूँ न मुझसे आ मिले वो दिल मे रहते हुए भी दूरी, ये खूब कर लिया...