कोख हर मां को दिया एक ईश्वर का अनमोल तोहफा है
कोख हर मां को दिया एक ईश्वर का अनमोल तोहफा है
कोख हर मां को दिया एक ईश्वर का अनमोल तोहफा है — कोख।
नौ महीने जिसमें बच्चों को जतन से पालती है मां।
खुद परेशान होकर भी बच्चे का पूरा ध्यान रखती है मां,
ईश्वर की दी इस नियामत को संभालती है मां।
हर वह स्त्री खुशनसीब होती है
जिसको मां बनने का मिलता है सौभाग्य।
आजकल जिनको यह सौभाग्य नहीं मिलता,
वे सरोगेट मदर — किराए की कोख से
अपने कुल के बच्चे को जन्म देती हैं।
मगर होती तो सरोगेट मदर भी एक मां ही है,
उसकी भावना को कौन समझता है,
उसकी मजबूरी को कौन समझता है?
वह भी तो अपनी कोख में
एक धड़कन को पलते हुए महसूस करती है,
हर हलचल पर मुस्कुराती होगी,
हर ठोकर पर सहलाती होगी।
मां तो मां होती है,
चाहे वह जन्म देने वाली हो
या किसी की सूनी गोद भरने वाली।
कोख केवल शरीर का हिस्सा नहीं होती,
उसमें भावनाओं का एक संसार बसता है।
कभी-कभी कुछ रिश्ते खून से नहीं,
त्याग, ममता और मजबूरी से जन्म लेते हैं।
और ऐसी ममता को भी
सम्मान मिलना चाहिए, पहचान मिलनी चाहिए।
