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संजय असवाल "नूतन"

Fantasy

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संजय असवाल "नूतन"

Fantasy

छीन लो मुझसे..!

छीन लो मुझसे..!

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छीन लो मुझसे

मेरी सारी हंसी 

और बांट दो मजलूमों को।


छीन लो मुझसे

मेरी सारी खुशी

और बांट दो मायूस उदास चेहरों को।


छीन लो मुझसे

मेरा सारा आकाश

कि मैं किसी की ओढ़नी बन सकूं।


छीन लो मुझसे

मेरी ये सांसें 

कि अनंत सागर में मैं स्वच्छंद बह सकूं।


छीन लो मुझसे

मेरी ये देह

और बिखेर दो मुझे पंचतत्व में।


छीन लो मुझसे

मेरा ये चैन सुकून 

कि फिर से मैं गहरी नींद ले सकूं।


छीन लो मुझसे

मेरी ये जवानी कि

फिर बचपन में मैं लौट सकूं।


छीन लो मुझसे 

मेरी तमाम ख्वाहिशें

कि बिन ख्वाहिश फिर मैं जी सकूं।



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