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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

4.5  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

तुम बस साथ रहना..!

तुम बस साथ रहना..!

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दिन ढलते जब रात गहराए

सांझ की बेला अगन लगाए,

हर धड़कन की हर गिनती में

तुम मेरी सांसों में ही रहना,

तुम बस साथ रहना।


सूनी आँखें जब भर आए

अनकहे दर्द का सैलाब उतर आए,

टूटे ख्वाबों की वीरान गलियों में

तुम साया बनके रहना,

तुम बस साथ रहना।


जब लफ़्ज़ मेरे थक चूर हो जाएँ

ख़ामोशी भी राज़ सुनाए,

आंखों की इस बेबस उम्मीदों में 

तुम उम्मीद बनके मेरी रहना,

तुम बस साथ रहना।


नींद रूठ गई ठहरी पलकों में 

ख़्वाब भी तैरे,  मेरी इन आंखों में,

मेरी तन्हाइयों की हर सिसकी में

तुम यादें बनकर रहना,

तुम बस साथ रहना।


भीगे मौसम में जब यादें बरसें

तेरी चाहत में हम भी तरसें,

मेरे होंठों की अधूरी मुस्कान में

तुम हँसी बनकर रहना,

तुम बस साथ रहना।


हर मोड़ पर जब दुनियां बदले

हर रिश्ता भी मतलबी सा दिखे,

मेरी सच्ची हर एक चाहत में

तुम बस मेरा बनकर रहना,

तुम बस साथ रहना।


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