मैं तूफ़ानों से टकराऊंगा..
मैं तूफ़ानों से टकराऊंगा..
मैं तूफ़ानों से टकराऊंगा
बिजली मैं बन जाऊंगा,
मेहनत की एक चिंगारी से
एक इतिहास नया रचाऊंगा।
रोक सके जो राह मेरी
ऐसी दीवार मैं लांघूंगा,
मेरे हौसलों के आगे अब
सब मुमकिन कर जाऊंगा।
सीढ़ी दर सीढ़ी चढूं
सांसों से आग जलाऊंगा,
हर कठिनाई को ठोकर में रखकर
लक्ष्य पर नज़र गढ़ाऊंगा।
पसीने की हर एक बूंद से मैं
किस्मत अपनी चमकाऊंगा,
धरती छोटी पड़ जाएगी
जब अम्बर पर मैं छा जाऊंगा।
रात घनेरी जितनी होगी
तब सूरज मैं बन जाऊंगा
हार अगर पास मेरे फटके
दृढ़ता से उसे भगाऊंगा।
लगन मेरी पहचान बनेगी
आत्मविश्वास का कवच चढ़ाऊंगा,
मेरे संकल्पों की गर्जन से
मैं सारा जग झुकाऊंगा ।
मैं रुकने वालों में नहीं अब
मैं आगे बढ़ता जाऊंगा,
मेरे इरादों की ज्वाला से
सारा जग रोशन कर जाऊंगा।
कुछ कर दिखाने निकला हूं मैं
बस कुछ करके दिखलाऊंगा,
दुनियां को रखूंगा मुट्ठी में एक दिन
मैं ये सपना सच कर जाऊंगा।
