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Kumar Vinod

Abstract

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Kumar Vinod

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तेरा नशा और हम

तेरा नशा और हम

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हर रात होते हैं तुझे छोड़ने के वादे, 

हर सुबह नशा मुझे जकड़ ही लेता है, 


हर रात होतें हैं तुझे भूलने के इरादे, 

तेरे हिजर का कहकशाँ मुझे पकड़ ही लेता है|



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