Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here
Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here

Neelam Sharma

Abstract


4  

Neelam Sharma

Abstract


बोझिल बस्ते

बोझिल बस्ते

1 min 604 1 min 604

ये बोझिल बस्ते

अर्ध मुद्रा में पड़े से,

बोझिल,अलसाए,

दृढ़ निश्चय पर अड़े से।

देखे मैंने बोझिल बस्ते


मानों चिर योग मुद्रा में,

हों अपने इष्ट देव को ध्याते।

पूछते हों जैसे प्रश्र खुद से

बोझ इतना हम क्यों उठाते।

देखे मैंने बोझिल बस्ते


देखो न ऐसा नहीं कि 

सभी तनाव ग्रस्त हैं।

कुछ मस्तकलंदर हैं,

कुछ आश्वस्त हैं।

देखे मैंने खुशदिल बस्ते


दरअसल खुद से आशाओं 

की पहुँच में हैं।

आज की परीक्षा कैसी होगी ?

इसी जटिल सोच में हैं।

देखे मैंने स्नेहिल बस्ते


इंद्रधनुष के सभी रंगों

के रंग हैं खुद में समेटे

कुछ सावधान मुद्रा में खड़े,

कुछ तक शवासन मुद्रा में लेटे।

देखे मैंने बोझिल बस्ते


ज़रा ध्यान से देखो इनको

हर बस्ता कुछ कहता है।

कोई व्यथित हैं कम अंकों से

कोई अल्हड़ हँसता रहता है।

देखे मैंने हरदिल बस्ते


Rate this content
Log in

More hindi poem from Neelam Sharma

Similar hindi poem from Abstract