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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Thriller

4.5  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Thriller

सीमाएं सिर्फ दिमाग में होती हैं..

सीमाएं सिर्फ दिमाग में होती हैं..

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हम वो नहीं जो हालात से डर जाएं

हम वो नहीं जो टूट कर बिखर जाएं,

हम वो हैं जो तूफानों में रास्ता बना लेते हैं 

हवाओं का रुख अपने लिए मोड़ लेते हैं।


जब जूते पहनकर हम ट्रैक पर उतरते हैं

तो सिर्फ एक दौड़ नहीं लगती,

एक जंग शुरू होती है खुद से,  

अपनी थकान से, 

अपनी हर सीमा से।


फौजी का हौसला और 

धावक का जुनून,

दोनों एक ही बात सिखाते हैं,

हार मानना हमारे शब्दकोश में नहीं 

और मंजिल तक कभी रुकना नहीं।


जब सांसें तेज़ चलने लगे

जब पैर तेरे जवाब देने लगे,

तब असली खेल शुरू होता है…

तभी बनती है एक अभूतपूर्व उपलब्धि 

तभी टूटती हैं सारी सीमाएं।


याद रखो साथियों

जब अनुशासन संग होता है 

तब दर्द कुछ पल का होता है,

और जीत की गूंज 

सालों साल तक सुनाई देती है।


तो उठो आगे बढ़ो,

खुद को फिर चुनौती दो,

क्योंकि सीमाएं मैदान में नहीं,

सीमाएं सिर्फ दिमाग में होती हैं।


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