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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं..

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं..

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कुछ दोस्त, मुझे बहुत याद आते हैं

सोते जागते सपनों में 

वो अक्सर ही छेड़ जाते हैं,

बातें करते लड़ते मुझसे 

फिर ना जाने कहां खो जाते हैं, 

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

बचपन बीता जिनके संग

कॉलेज संग जाते थे,

आवारागर्दी करते वादियों में

फिर वहीं हम सो जाते थे,

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

अब हम बिछड़े यहां वहां

एक दूजे से दूर हो गए,

रोजी रोटी जीवन यापन,चकाचौंध शहरों में खो गए

बैठ कभी हम यादों में मुरझाते हैं

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

मोबाइल की स्क्रीन पे नाम देखा 

तो उँगलियाँ ठहर सी जाती हैं,

फिर मिलेंगे कहते-कहते

आंसुओं को नहीं रोक पाते हैं 

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

त्योहारों में वो मिलना जुलना

सरगम की धुन हम गाते हैं,

भीड़ में भी हम तन्हा तन्हा

वो बेफ़िक्री पल भूल जाते हैं 

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

वक़्त ने सबको बदल दिया

अब ख्वाब नए हम सजाते हैं,

पर दोस्ती के वो सच्चे पल

आँखों में फिर डूब जाते हैं,

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

पता नहीं फिर मिलें ना मिले 

उम्मीद दिल में अब भी सजाते हैं,

साथ बैठकर हँस पाएँगे

ये दुआ उस रब से कर जाते हैं 

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।

अब न शिकायत उनसे मुझको

एक चुप्पी से सध जाते हैं,

सीख लिया उनके बिना भी

चलो  दुनियां एक नई हम बनाते हैं 

कुछ दोस्त मुझे बहुत याद आते हैं।


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