STORYMIRROR

Jyotiramai Pant

Fantasy

3  

Jyotiramai Pant

Fantasy

बसंत

बसंत

1 min
266

अब के वसंत आना

खुशियां देकर जाना

वन उपवन फूल खिले

आना उन गलियों भी

पथ कंटक धूल भरे 

प्यास भूख भर बस्ती

सुख जिनका अनजाना

अब के वसंत आना


बच्चों की आंखों में स्वप्न बसे है

कितने रंग भर जाएं

सच में उनकी झोली भर दें

गाएं सुखद तराना

अब के वसंत आना


वे भविष्य की आशा

बोलें मीठी भाषा

फूलों तितली रंग से जीना

सबके संग से गुण अपने भर जाना

अब के वसंत आना



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy