STORYMIRROR

Jyotiramai Pant

Fantasy

3  

Jyotiramai Pant

Fantasy

मोरे नैना

मोरे नैना

1 min
215

सखी! मोरे नैना बावरे

लाख छुपाएँ मन के प्रहरी

अंतस में सुख दुख की गठरी

जिद्दी शिशु से कर मनमानी

ले आते दृग -तट ज्वार

रे सखी !मोरे ...... 


खुल जाए मन के तहखाने

लगते मोती खूब लुटाने

उलझनों में भी ओस 

मोती बूँद -बूँद करे बिखराव

रे सखी ! मोरे .....


बिना शब्द सब राज़ खोल दें

अपनी ही भाषाएँ बोलें

लड़े किसी से अँखियों रस्ते

प्रिय सुघड़ छवि मन गढ़वाय

रे सखी !मोरे ..



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy