Shailaja Pathak
Fantasy
धरती है ऊपर, आकाश जमी पे,
बादलो में उड़ रही हूं मैं,
बिजली की पहन साड़ी, सितारे जड़ी,
चंद्रमा को बना चुड़ामणि
उड़ रही हूँ मैं,
उड़ रही हूँ मैं।
रामायण में मह...
मै नदी हूं
बोलो ना
अंगूठी
मेरा चांद
रेल की पटरी
कृति
मैं और तुम
अंगारे
यादें
कभी कोई शिकायत मत करना दोस्तों। आखिर एहसास भी तो होते हैं धीरे धीरे कभी कोई शिकायत मत करना दोस्तों। आखिर एहसास भी तो होते हैं धीरे धीरे
कल-कल कलरव तेरा सुन के, चपल चंचल चिड़ियाँ चहकीं। कल-कल कलरव तेरा सुन के, चपल चंचल चिड़ियाँ चहकीं।
हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे। हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे।
तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम। तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम।
आईं मिथिला की राजकुमारी वधू बनकर तुम्हारा अहोभाग्य था आईं मिथिला की राजकुमारी वधू बनकर तुम्हारा अहोभाग्य था
सुरभित साँसों से सौरभ ले, हैं कानन की कलियाँ महकीं। सुरभित साँसों से सौरभ ले, हैं कानन की कलियाँ महकीं।
राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर जाता सार राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर...
जब मछली सी जनता इनके जाल में खुद आकर फंस जाती है जब मछली सी जनता इनके जाल में खुद आकर फंस जाती है
जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं
सोच सोच में भी अंतर होता है, कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे होते हैं। सोच सोच में भी अंतर होता है, कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे होते हैं।
जिस समंदर में समाने के लिए भागी जा रही हूँ वह खारा है जिस समंदर में समाने के लिए भागी जा रही हूँ वह खारा है
और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो
तब इन्हीं रंगों को देख थोड़ा सुख चैन पाता हूँ तब इन्हीं रंगों को देख थोड़ा सुख चैन पाता हूँ
मुसलसल खुशियों के लिये हल खोजा गया मुसलसल खुशियों के लिये हल खोजा गया
बाते करते करते तेरा रो देना वह भावात्मक भाव तुम्हारा हो बाते करते करते तेरा रो देना वह भावात्मक भाव तुम्हारा हो
सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे। सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे।
यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ
इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है। इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है।
भर दे एहसास अपने होने का कि मैं हूं ना सिर्फ तुम्हारे लिए, स्त्री बस यही तो चाहती ह भर दे एहसास अपने होने का कि मैं हूं ना सिर्फ तुम्हारे लिए, स्त्री बस यही तो ...
ब्रज भूमि तो पिया की मोरे लीला का स्थल था, सीखना जो सबको पाठ अमर था ब्रज भूमि तो पिया की मोरे लीला का स्थल था, सीखना जो सबको पाठ अमर था