Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Shailaja Pathak

Abstract


4  

Shailaja Pathak

Abstract


मैं और तुम

मैं और तुम

1 min 249 1 min 249

मै, और मेरे अंदर के तुम,

जब आपस मेंं बातें करते हैं,

तब, श्वास प्रश्वास रुक सा जाता है,

मानो आकाश आ जाता है कहीं दूरsssss,

धरती से मिलने, क्षी्तिज  बन,

अक्सर सूर्य मैंने देखा है ज़मीं पर,

मेरे बहुत करीब,

और रंग देता है मेरा पूरा संसार रक्त,

रक्त आकाश, रक्त धरती , रक्त मै और रक्त तुम,

सिर्फ बातेे करते हैं तो ये हाल है,

जब मिलोगे तुम तो बताओ क्या होगा?



Rate this content
Log in

More hindi poem from Shailaja Pathak

Similar hindi poem from Abstract