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Shailaja Pathak

Tragedy

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Shailaja Pathak

Tragedy

यादें

यादें

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कभी कोई वक्त था, जब,

यादों की जुगाली करती रहती थीं मै,

बेेेेेवजह  हंसती, मुुुुुस्कुराती रहती थीं मैं,

अब बस वो कड़वी कुुंनेन की गोली सी यादों को,

अल्फाज़ दर अल्फाज़ निगल लेती हु मैं ।



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