STORYMIRROR

Bhavna Jain

Tragedy

4  

Bhavna Jain

Tragedy

दर्खास्त

दर्खास्त

1 min
356

तुम प्यार लिखते हो 

क्योंकि तुम्हें वो मिला

मैं गम लिखती हूं

क्योंकि मुझे ये मिला


तुमको इज्जत मिली

मुझको नफरत मिली

वाह री दुनिया,,,कहती है 

हम बदल रहे हैं

हम समान हो रहे हैं..


तुम्हें राज तिलक मिला

मुझे सरेआम जलाया गया

वाह री दुनिया,,, कहती है

हम बदल रहे हैं

हम समान हो रहे हैं...


मेरी दर्खास्त है उन लाचार 

दबी सहमी प्रताड़ित चीखों से

न उठाओ कोई शस्त्र तुम

न भरो कोई हूंकार तुम

खुरची रूहों को कुछ सुकूं मिले,,,,,

बना लो बाझंपन को गहना तुम!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy