STORYMIRROR

Hemant jain

Tragedy

4  

Hemant jain

Tragedy

माँ

माँ

1 min
166

'क्या होता है माँ का प्यार

कैसा होता है उसका दुलार

इन सब बातों से मैं अनजान

मैं हूँ बिन माँ की संतान...

कैसे सुलाती है लोरी गाकर

कैसे जगाती है थपकियाँ दे कर

मैं कैसे ये जान पाऊँ.....

माँ मैं तुझे कहाँ से लाऊं...?

व्यथित मन करे माँ की पुकार

कौन है जो सुन सके मेरी गुहार 

बचपन के दिन लौटा दे कोई

मेरी माँ से मिला दे कोई...

टूट चुका है 'हृदय' खिलौना

जल गया रे जीवन बिछौना

कौन बने मेरी नैया का खिवैया

माँ की गोद बन जा री पुरवैया....!!!!!


Rate this content
Log in

More hindi poem from Hemant jain

Similar hindi poem from Tragedy