Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Akanksha Gupta

Tragedy

4  

Akanksha Gupta

Tragedy

मैं एक नारी हूँ। (सिया की कथा)

मैं एक नारी हूँ। (सिया की कथा)

1 min
335


जीवन मेें कभी ना हारी हूँ

क्योंकि मैं एक नारी हूँ


अयोध्या नगरी की महारानी सिया

वन वन भटकी जीवन भर

पति का वचन निभाने को

चलती रही डगर-डगर


दशानन के छल कपट से

लड़ी अकेले निज संकल्प से

हुआ विवश त्रिलोक विजेता 

निज अहं के भार से


त्याग तपस्या करते करते

बिताया जीवन का हर क्षण

कितने ही व्यंग्य बाण सहे 

अपने आत्मसम्मान पर


ना डरी ना कदम रुके

जलती रही अंतिम क्षण तक

फिर भी मैं जीवन धारी हूँ

क्योंकि मैं एक नारी हूँ!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy