बस तुम अपने हो
बस तुम अपने हो
वक्त बेवक्त आते हो,
कुछ झकझोर जाते हो,
कौन हो तुम,
और क्या है चाहत,
ये कभी नहीं बतलाते हो।
कभी एक हवा के झोंके की तरह,
कभी फूलो की सुगंध की तरह,
मन में उल्लास जगा जाते हो,
जब हताश होती हूँ,
बन प्रेरणा आ जाते हो,
मन में एक आशा की
किरण जगा जाते हो,
मेरी डगमगाती कश्ती
को सम्हाल लेते हो,
गहन अंधकार में,
प्रकाश फैला जाते हो,
मन में मुस्कुराते हो,
हर पल बताते हो,
मैं हूँ तो क्या है भय,
बस अधरों पे मुस्कान
सजा जाते हो,
हे मेरे प्यारे प्रियतम,
बस तुम ही तुम तो
दिख जाते हो,
हर कण में, हर कण में,
मैं फिर कैसे कह दूं
कि तुम साथ नहीं हो,
तुम और तुम ही तुम,
बस अपने हो,
बस अपने हो।।

