बेटियां
बेटियां
मैं ये वादा तो नहीं करती,
कि जहाँ खुशियों से भर दूंगी,
भौतिकता के खजाने से,
घर आंगन भर दूंगी,
तू तो मेरी परछाई है बेटी,
तुझे जीतना मैं सिखा दूंगी,
आएंगे दुःख हज़ार जीवन में,
परास्त उन्हें तू कर लेगी,
इतनी सशक्तता तेरे मन में,
मेरी लाडो मैं भर दूंगी।
संघर्ष भी चाहे लाखों आये,
तू कभी लड़खड़ाना न,
जीवन की इन परीक्षाओं से,
कभी भी तू घबराना न,
धन शायद न दे पाऊँ,
भौतिकता पा लेने को,
पर संस्कार सदा ही दूंगी,
विजय जंग में पाने को,
तुझे नहीं मैं सिखाती,
अधिकारों की तू मांग करे,
कर्तव्य पथ पर तू चल,
स्वयं ही यह अर्जन करे,
मुझे बनाना है तुझे,
एक सशक्त नारी आज,
भेद हर दुष्टता की दीवारें,
बचाये तू हर नारी की लाज,
कोई नहीं पथ हो ऐसा,
जहाँ तू चल पाए न,
कर अभिषेक स्वयं का,
जीत हर एक सपना,
उड़ान देती मैं तुझे,
स्वच्छंद गगन में उड़ने को,
बढ़ा कदम अब तू ऐसा,
हर कुरीति दूर करने को।।
