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Meenakshi Gandhi

Drama

5.0  

Meenakshi Gandhi

Drama

बचपन

बचपन

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कितना अच्छा लगता है ,

जब हम बच्चे बन जाते हैं ,

बच्चों सा झगड़ते हैं ,

बच्चों सा चिल्लातें है ।।


गिरते ,संभलते रहते हैं,

और हिम्मत नई जुटाते हैं,

अपनी चाहत को पाने के खातिर ,

सब से हम लड़ जाते हैं ।।


न रखते हैं वैर किसी से ,

बुरा भला सब भूल जाते हैं ,

रहते हैं बस अपनी धुन में ,

खुद से ताल मिलाते हैं ।।


ना सोचते कल क्या होगा ,

बस आज में जी जाते हैं,

ना ही दिखावा,ना ही स्वार्थ ,

बेइन्तहां प्यार लुटाते हैं।।


जब इतना सुकून है इस बचपन में,

ना जाने हम क्यों बड़े हो जाते हैं ।।




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