उजड़े घरों की बिखरन

उजड़े घरों की बिखरन

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अम्मा... देखो.. टीवी चैनल पर खबर चल रही है कि जैश का मसूद अजहर मर गया... अम्मा का कलेजा धाड़--धाड़ हिलने लगा... अभी पिछले महीने ही उसके बड़ा बेटा तिरंगे में लिपटा हुआ आया था। जिसकी बस को इस पापी के बनाए दो फिदाइन ने उड़ा दिया था।

अभी पहली बार तो जनता के आक्रोश से त्रस्त सरकार ने सेना को खुली छूट दे दी कि वह अपने संसाधनों से अपने जवानों पर हुए आक्रमण का बदला ले ले। आतंक का समूल नाश करें।

अभी ही तो सुना था कि वायुसेना ने रात में वार कर इसके तीन ठिकाने उड़ा दिए...चालीस का बदला.... तीन सौ से ले लिया।

अम्मा टीवी के सामने आ गई और देखने लगी..... ब्रेकिंग न्यूज चल रही थी कि अजहर मसूद मारा गया.... पर अभी न तो भारत सरकार ही पुष्टि कर रही है.... न पाकिस्तानी सरकार ही.... पर खबर तो चल रही है।

अम्मा ने भगवान को हाथ जोड़े और प्रार्थना करने लगी कि हे भगवान.... यह खबर सच्ची मत कर देना....!

क्या बोल रही हो अम्मा... यह तो बढ़ियाँ खबर है... छाती ठंडी हो गई.... बदला पूरा हो गया....और क्या चाहिए...?

तभी तो कह रही हूँ कि बेटा.... यह आग बुझनी नहीं चाहिए.... क्या यह पहला फिदाइन हमला था...., क्या आखिरी है.... ये चालीस क्या पहली बार मरे हैं.... यह नासूर तो कब से वार कर रहा है.... कब से मार रहा है... यह मर गया तो इसका कोई साथी मारने लगेगा...!

अब सरकार इसको खत्म करने पर अमादा है...सेना का आंतक का समूल नाश का प्रण है...तब इसे पहले वार में ही नहीं मरना चाहिए...

इसे, इसके हर ठिकाने, इसके हर जेहादी के मरने के पहले इसे नहीं मरना चाहिए... इसे, इसके जैसों को इतना दौड़ाना चाहिए कि यह रोज मौत मांगे... रोज मरने के लिए तड़पे.... पर इसको आसान मौत नहीं मिलना चाहिए बेटा.... कभी नहीं मिलना चाहिए....!

अम्मा की आंखों के आंसुओं में हर उजड़ा हुआ घर रो रहा था.... बिलख रहा था....!


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