ज़िद्द है
ज़िद्द है
ऐ हुस्न तेरा हर किसी को तन्हाई में इंतज़ार,
और मेरा दिल है बस तुझे देखने को बेकरार I
तेरी ज़िद्द है मेरी खुशबू से महके महफ़िल,
मेरी ज़िद्द है एक फूल से ही बने गुलफाम।
मैं नहीं तेरी दुनिया का बाज़ारू घूमता लटटू,
अभी और ज़िंदगी है देखता रहना ऐसे टटटू I
तेरी ज़िद्द है सब ग़ुलाम हो बस नज़र बटटू,
मेरी ज़िद्द है कोई न चखे ऐसा खारा सत्तू।

