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Tanha Shayar Hu Yash

Romance Tragedy Fantasy

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Tanha Shayar Hu Yash

Romance Tragedy Fantasy

एक अरसा हो गया तुम्हें देखे..

एक अरसा हो गया तुम्हें देखे..

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एक अरसा हो गया तुम्हें देखे,
तेरा ख़्वाबों में आना
मिलने का बहाना तो नहीं?

दिन यूँ ही गुजर जाते हैं,
पर रात हर बार
तेरे नाम पर ठहर जाती है।

मैं जागता हूँ तो यादें थक जाती हैं,
सोता हूँ तो तू
बिना दस्तक चली आती है।

न कोई शिकायत,
न कोई शिकवा—
बस ये उलझन कि
जो सामने नहीं है,
वो इतना क़रीब कैसे है?

एक अरसा हो गया तुम्हें देखे,
तेरा ख़्वाबों में आना
क्या सच में मिलने का बहाना तो नहीं?
******
एक अरसा हो गया तुम्हें देखे,
और ये अरसा
अब वक़्त नहीं,
आदत बन चुका है।

तुम सामने नहीं होते,
फिर भी
हर ख़ामोश लम्हे में
तुम्हारी मौजूदगी महसूस होती है।

रातें जब थक कर
आँखों से उतरती हैं,
तुम ख़्वाब बनकर
बिना इजाज़त चले आते हो।

मैं पूछता हूँ ख़ुद से—
क्या ये महज़ नींद का धोखा है,
या दिल की कोई पुरानी साज़िश?

क्यों हर मुलाक़ात
ख़्वाबों में ही मुकम्मल होती है,
और हक़ीक़त
हर बार अधूरी रह जाती है।

एक अरसा हो गया तुम्हें देखे,
तो क्या
तेरा ख़्वाबों में आना
मिलने का बहाना तो नहीं?
*****
एक अरसा हो गया तुम्हें देखे…
और ये अरसा
अब घड़ी में नहीं गिना जाता,
ये दिल में बस चुका है।

तुम सामने नहीं होते,
फिर भी
हर ख़ामोशी में
तुम्हारी आहट सुनाई देती है।

रात जब सवाल बनकर उतरती है,
तुम ख़्वाब बनकर
बिना पूछे चले आते हो।

मैं खुद से पूछता हूँ—
क्या ये नींद का वहम है,
या दिल का कोई पुराना सच?

क्यों हर मुलाक़ात
सिर्फ़ ख़्वाबों में मुकम्मल है,
और हक़ीक़त
हर बार अधूरी रह जाती है?

एक अरसा हो गया तुम्हें देखे…
तो क्या
तेरा ख़्वाबों में आना
मिलने का बहाना तो नहीं?

तनहा शायर हूँ-यश 


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