बातें मीठी
बातें मीठी
बातें तुम्हारी मीठी हैं, आँखों में तलवार है,
मुख पर है मर्यादा, भीतर पूरा व्यापार है।
हाथ जोड़कर मिलते हो, भीतर छुपी है चाल,
मुस्कान ओढ़े रहते हो, पीठ पीछे है काल।
दोस्ती के नाम पर सौदे, हर रिश्ता मुनाफ़ा है,
ज़रूरत तक जो साथ चले, वही तुम्हारा वादा है।
साथ बैठकर हँसते हो, बातों में अपनापन,
मौक़ा मिलते ही बदलता, रंग तुम्हारा क्षण-क्षण।
मेरी हार पर चुप्पी थी, मेरी जीत पे शोर,
मेहनत मेरी सीढ़ी बनी, तुम चढ़े थे बिन डोर।
पीठ थपथपाकर कहते, “मैं तो तेरा हूँ यार”,
और पीठ पीछे गिनते थे, मेरे हिस्से का भार।
सच बोलने का ढोंग रचा, झूठों की बारात लिए,
भरोसे को गिरवी रखा, चालाकी की सौग़ात दिए।
आईने से डर लगता है, इसलिए मुखौटे पहने,
अपने ही साए से भागो, ऐसे रिश्तो के क्या कहने ।
अब समझ आया साथी नहीं, तुम बस एक सबक थे,
मेरी सादगी के बदले, तुम मिले जो एक सड़क थे।
आज अकेला ठीक हूँ मैं, तेरी भीड़ से दूर, क्योंकि
शातिर तेरे साथों से, "तनहा" अपनी दुनिया मे मशहूर।
तनहा शायर हूँ-यश
