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NEERAJ SINGH

Drama

3  

NEERAJ SINGH

Drama

खामोशियाँ

खामोशियाँ

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240

यह कौन सी हवा का पहरा है

कि शहरों में सन्नाटा पसरा है


 खामोशियां चीख रही है जोरों से

 जिंदगियाँ झांक रही है झरोखों से


 जिधर देखो उधर कोहराम मचा है

 हर तरफ रोटी का सवाल खड़ा है


अब मेरी कोई भी सुनता नहीं है

दिलों में तूफान अब थमता नहीं है 


भूखे प्यासे लोग यहां परेशान हैं

अब जान है तो समझो जहान है


अपनों के खातिर अपनो को दगा

मज़बूरी में लोगों ने मुझ्र बहुत ठगा


हौसले को अपने बनाए रख नीरज

नया संदेशा लाएगा कल का सूरज।


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