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उदासी

उदासी

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मुमकिन है कि मैं उदासी की राही हूँ

पर एक राह मुझ में भी थी कभी खुशी की


वो पलट कर नहीं देखता तो अच्छा था

वो पलटा मेरी तो दुनिया ही पलट गई


एक वो सुबह नहीं होती तो अच्छा था

एक उस सुबह ने हर सुबह शाम कर दी


गाली देकर दूर करता तो अच्छा था

ऐसे नम आँखो से कौन दूर करता है


काश कि पानी में एक ही नाव होती

वो दूसरी नाव में बैठने की ज़िद नहीं करता


होश में नहीं हूँ नशा करती हूँ अब

एक पागल था जिसे कोई और ले गया


क्या बोलूं कि कौन है वो मेरा

ख़ुदा माना था ख़ुदा हो गया वो



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