STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया

1 min
226

प्यार में इतने गम सह न सका,

किस्सा बेवफाई का कह न सका,

जिंदगी में खुद जहर बन बैठा,

बेवफा को जहर पिला न सका।


प्यार में फंसाकर जज्बात से खेलना,

हंसीनों का हू व हू जाल होता है।

कुछ कर नहीं सकते चाहकर भी,

जज्बात में आकर बहकना होता है।


गम के आंसू पोंछने से क्या फायदा,

उठा कलम और लिख बेवफा सनम,

संभल जा यही है जिंदगी का गम,

आंसूओं को रास्ता बना दे कायदा।


क्या खता हुयी जो भुला दिया,

जिंदगी में भूलना राज बना दिया।

न कोई रुसवाई न खता प्यार में,

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy