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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया

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प्यार में इतने गम सह न सका,

किस्सा बेवफाई का कह न सका,

जिंदगी में खुद जहर बन बैठा,

बेवफा को जहर पिला न सका।


प्यार में फंसाकर जज्बात से खेलना,

हंसीनों का हू व हू जाल होता है।

कुछ कर नहीं सकते चाहकर भी,

जज्बात में आकर बहकना होता है।


गम के आंसू पोंछने से क्या फायदा,

उठा कलम और लिख बेवफा सनम,

संभल जा यही है जिंदगी का गम,

आंसूओं को रास्ता बना दे कायदा।


क्या खता हुयी जो भुला दिया,

जिंदगी में भूलना राज बना दिया।

न कोई रुसवाई न खता प्यार में,

प्यार की वफा को बेवफा बना दिया।


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