Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.
Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.

Amit Kumar

Abstract Romance


4  

Amit Kumar

Abstract Romance


तुम्हारी स्मृति में

तुम्हारी स्मृति में

1 min 350 1 min 350

ये पतझड़ तुम्हारी

यादों का

बहार बन गया है

तुम्हारी स्मृति में

तुम्हारी स्मृति अब मुझे

"आषाढ़ का एक दिन" की

मल्लिका सी लगती है

और स्वयं को मैं

ठगा हुआ कालिदास का

प्रतिद्वंदी विलोम सा

महसूस करता हूँ ....

नहीं जानता तुम

मेरी इस विचारग्नि पर

किस तरह का

अमृतजल बिखेरेगी...

ये मेघ जो कभी काले और

घने से उमड़ आये थे

तुम्हारे यौवन पर

अब कुंठाओं से घिरे हुए

कोई काँटों की

अमरबेल से काले

घने स्याह सर्पझुंड

से लगते है......



Rate this content
Log in

More hindi poem from Amit Kumar

Similar hindi poem from Abstract