STORYMIRROR

Amit Kumar

Others

4  

Amit Kumar

Others

मेरे शब्द

मेरे शब्द

1 min
416

मेरे शब्दों को

मौत नही आयेगी

वो ज़िंदा रहेंगें

किसी सी आंखों में

सपने बनकर

किसी के दिल में

लालसा बनकर

वो सजेंगे किसी के

माथे पर

चंदन का टीका बनकर

किसी के लबों से

बोलो की खनक बनकर

वो कबीर के दोहों से

हो सकता है न गाये जाएं

वो प्रेमचंद की कहानियों से

हो सकता है न दोहराये जाएं

वो अमृता की पीर को

हो सकता है न सुना सकें

वो पाश की कविता से

हो सकता है न धुंऐं उठा सकें

फिर भी कोई नज़र तो

उन तक भी आयेगी....

    


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन