STORYMIRROR

Kamal Purohit

Abstract

4  

Kamal Purohit

Abstract

गुलज़ार देहलवी

गुलज़ार देहलवी

1 min
235

ज़िंदगी में कई जिंदगी गुजरी है।

तेरे बिन तो नहीं यह कभी गुजरी है।

नाम गुलजार है, गुल से भरपूर हो,

खुशबू में आपकी ज़िंदगी गुजरी है।

मौत का काम है जिंदगी लूटना,

मौत आने से पहले यूँ ही गुजरी है।

कितने शाइर यहाँ आये और चल दिये,

उनके बिन पर नही मौशिकी गुजरी है।

आज फिर इक सितारा चला धरती से,

आसमानों में इक रोशनी गुजरी है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract