STORYMIRROR

Agrawal Shruti

Abstract

4  

Agrawal Shruti

Abstract

होली की उमंग

होली की उमंग

1 min
204

प्यार खोजने निकले हैं 

नफरत के बाजार में 

चलो ढूँढ लाएँ सौहार्द 

होली के त्योहार में 


किसी के आँसू पोंछ सकें और

खिलखिलाएँ बच्चों के संग

बोझ न हो कोई सीने पर

सार्थक तभी होली की उमंग 


शान, दिखावे, दंभ, नफरतें 

कहाँ खो गया सहज इंसान 

और नहीं कुछ माँगें ईश्वर 

हमें बना दो महज इंसान 


हुल्लड़ में डूबे रंग भरे बदन

फाग, गायिकी, पिचकारी, भंग

सचमुच मिला दे दिलों को होली

बाँटे माधुर्य पकवानों के संग।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract