Shruti Mishra
Abstract
माटी की मूरत नहीं, ममता की जरूरत हूं मैं,
घबराती नहीं, पर चुप रह जाती हूं मैं।
कष्ट सहना नहीं चाहती पर सह जाती हूं मैं,
कमज़ोर हूं नहीं, कमज़ोर कहलाती
उम्मीद
माटी की मूरत
कहते सुना है राम रहीम वाहेगुरु सारे एक ही पैगंबर में कहते सुना है राम रहीम वाहेगुरु सारे एक ही पैगंबर में
ऊंचे महलों में रहने वाले घमंड में मदमस्त चूर रहने वाले अकड़ में ऐंठ कर भी ऊंचे महलों में रहने वाले घमंड में मदमस्त चूर रहने वाले अकड़ में ऐंठ कर भी
पिता का त्याग अनुपम अनमोल जिसने लायक बनाया हमें तौल पिता का त्याग अनुपम अनमोल जिसने लायक बनाया हमें तौल
उसके होने से घर का हर कोना उज्ज्वल न होने पर आँखें होती जल-थल उसके होने से घर का हर कोना उज्ज्वल न होने पर आँखें होती जल-थल
मैं बात बात में ही सब को तोलता हूँ मैं तो अब, बस मौन होकर बोलता हूँ!! मैं बात बात में ही सब को तोलता हूँ मैं तो अब, बस मौन होकर बोलता हूँ!!
खो दूंगी खुद को गर गुनहगार बन बैठी गुनाहों की दुनिया से पनाहागार कर दे खो दूंगी खुद को गर गुनहगार बन बैठी गुनाहों की दुनिया से पनाहागार कर दे
यूं ठोकरें खाकर चले थे , रास्ते के काटें सुई बन चुकी है यूं ठोकरें खाकर चले थे , रास्ते के काटें सुई बन चुकी है
कभी एहसास आसमान का, चांदनी को जमीं पे बिछाया होगा, कभी एहसास आसमान का, चांदनी को जमीं पे बिछाया होगा,
जीवन की रणभूमि में पथिक को जीवन पथ पर बढ़ना है जीवन की रणभूमि में पथिक को जीवन पथ पर बढ़ना है
मज़दूरों के महत्व को बिल्कुल नहीं समझ रहे हैं मज़दूरों को बेबस, लाचार, असहाय मज़दूरों के महत्व को बिल्कुल नहीं समझ रहे हैं मज़दूरों को बेबस, लाचार, असहाय
कहां आसान होता है मां होना देकर सारी दौलत अपनी मांगना हक पड़ता कहां आसान होता है मां होना देकर सारी दौलत अपनी मांगना हक पड़ता
नौ महीने तक उदर में रखकर जिसने तुमको पाला । नौ महीने तक उदर में रखकर जिसने तुमको पाला ।
संपूर्ण विश्वास के साथ निभाने लगी जाते हैं संपूर्ण विश्वास के साथ निभाने लगी जाते हैं
मेरी जिजीविषा के परों को पखारने को अथाह आकाश मिला तुमसे मेरी जिजीविषा के परों को पखारने को अथाह आकाश मिला तुमसे
सुख-चैन, सब से हाथ धो दिया, ऐसा हाल हुआ मेरा, जब से मैंने तुम्हें खो दिया। सुख-चैन, सब से हाथ धो दिया, ऐसा हाल हुआ मेरा, जब से मैंने तुम्हें खो दिय...
अपने पिता से मिलो ना मिलो फॉर्मलिटी करो मिलने का अपने पिता से मिलो ना मिलो फॉर्मलिटी करो मिलने का
जीना जीना वो है कैसा ये मेरा खाली खाली पन रह गया अकेला जीना जीना वो है कैसा ये मेरा खाली खाली पन रह गया अकेला
यह हमारी आपकी ही नहीं हर प्राणी की कहानी। यह हमारी आपकी ही नहीं हर प्राणी की कहानी।
मन से ही आधी जंग जीती जाती है मन के हार जाने से होता जीवन तंग मन से ही आधी जंग जीती जाती है मन के हार जाने से होता जीवन तंग
चन्दा मामा भी दागदार माँ तू कितनी अच्छी है। चन्दा मामा भी दागदार माँ तू कितनी अच्छी है।