STORYMIRROR

Rajiv Jiya Kumar

Romance Fantasy

3  

Rajiv Jiya Kumar

Romance Fantasy

तुम जन्नत मेरी

तुम जन्नत मेरी

1 min
267

इक सुहानी सी 

कही गई जां भाती कहानी

सजी इक जन्नत की गुड़िया 

भाए हर पल दिल को

वह नजाकत की रानी,

उठी निगाह मुझ पर

देती उमंग आमंत्रण की रवानी


खिलखिलाए लब

जुबां मौन

पर बोल जाती हैं आँखें

प्रीत की अनसुनी इक कहानी,

अंग अंंग की झलक

दंग करती, रूप की यह बानगी

मदमाती चाल 

छलकती यौवन की चाशनी,


घुल तुम में रह जाए 

सुनो न सनम

तुम जिगर की कामिनी

ख्वाब तुम्ही जन्मो की

आगोश तेरा भाए

सिमट यही रूक जाए

तुम जन्नत, तुम्ही मेरी जामिनी।।

     



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance