तुम हो। -------
तुम हो। -------
एक ख्वाब सरीखी बुनी गई
लाखों में एक चुनी गई
दूजा कौन कौन है तुमसा
कहां चल पाते एक पग तुम बिना
तुम हो रीना, तुम हो रीना।।
हंसना,चलना तुमसे जाना
मैं अकेला तुम्हें अपना माना
चंद कदम चलती रहो न साथ
सीख तो लें कैसे कैसे तुम बिन जीना
तुम हो रीना, तुम हो रीना।।
जब बात चली बढ़ छूने की आसमां
संग संग चली तुम बन रहनुमा
राह सजाती मेरी चली चली तुम
छुपा नयनों के ओट में जैसे मैं कोई मीना
तुम हो रीना, तुम हो रीना।।
तुम हर पल हर पल संग रहो
मैं सुन रहा तुम सब कुछ कहो
तुम हो तो बढ़ना चढ़ना आसां है
सीखा तुमसे हीं जीतने को हार भी पीना
तुम हो रीना, तुम हो रीना।।
✍️ राजीव जिया कुमार,
सासाराम, रोहतास, बिहार।
