STORYMIRROR

Vandana Singh

Tragedy

1  

Vandana Singh

Tragedy

टूट रहा है

टूट रहा है

1 min
722


जो रहा नहीं

वो था कभी

और जो है अभी

वो भी मेरे

अहम् के संग

टूट रहा है

दिनभर

रातभर

जो मुझे नश्तर

चुभोता

वो संगी अब

रहा नहीं

टूटे हर ख्वाबों के

संग

बीता नहीं कोई भी

पल

और जो बीत रहा है

वो भी मेरे भ्रम के संग

टूट रहा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy