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Alka Nigam

Romance Fantasy

3  

Alka Nigam

Romance Fantasy

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर

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तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है


तेरी महकी महकी साँसों का

पैरहन मैं ओढ़ लूँ,

तेरे मख़मली एहसास के

कुछ ख़्वाब मैं भी मोल लूँ।

तेरी हैरानगी मेरी दीवानगी

ये शामों सहर की आवारगी।

तू ही बन्दगी तू ही फ़ितूर है।

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है


उम्र की हर शाख़ पे

खिलें गुल हमारी चाह के,

इस ज़मी से उस फ़लक तक

मोगरे की बेल से।

ये रस्में और ये रिवायतें

गूँजे हर सूं इश्क़ की आयतें।

यही प्यार का दस्तूर है।

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है।


तेरी साँसों के बिछौने पे

मैं करवटें तेरे साथ लूँ,

तेरी संदली सी महक से

रूह तर अपनी करूँ।

मुझे भा गई तेरी सादगी

करूँ रात दिन तेरी बन्दगी

तुझे इल्म तो ये ज़रूर है

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है


तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है

तेरी तिश्नगी तेरा सुरूर है......।।



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