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Deepa Jha

Romance

4  

Deepa Jha

Romance

रंग दूँ जो तोरा मन

रंग दूँ जो तोरा मन

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जो आ गए हो बन मोहन लाल 

छुपा लाये हो जो अपने साथ गुलाल 


कर दी मेरी चुनरी जो तूने लाल 

सोचना न छोड़ दूँगी तोहे यूँ ही नन्द लाल

मुट्ठी मेरी भी है भरी , है रंग से माला माल 


जो रंग दूँ तेरे मन को ही इस बार 

मेरी रंग भरी चुनरी में कैद हो जाएगा 

तू आने वाले हर क्षण, हर साल।


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