STORYMIRROR

Deepa Jha

Abstract Romance

3  

Deepa Jha

Abstract Romance

मुझे गुज़रने न देना

मुझे गुज़रने न देना

1 min
201

अब की जो किरण बन आऊं,

मुझे बुझने ना देना

अब की जो बरसूं बन कर बूँद ,

मुझे बह जाने ना देना

अब की जो खिलूँ बन कर फूल,

मुझे मुरझाने न देना

अब की जो झाँकूँ तेरी गली में बन कर चाँद ,

मुझे छुप जाने ना देना

अब की जो छूऊँ बन कर हवा,

मुझे गुज़रने न देना

भर लेना अपनी साँसों में,

समेट लेना अपनी बांहों में,

सजा लेना अपनी निगाहों में,

वो जो सुन ना पाए थे तब,

सुन लेना तुम मेरी अनकही बातों में 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract