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ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Romance


4.5  

ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Romance


उड. जाऐ मेरी निंदिया

उड. जाऐ मेरी निंदिया

1 min 172 1 min 172

कब से था इंतज़ार मुझे

अबके होली आने का

फुहार बीच तेरे प्यार के

रंगों में खो जाने का


रंग गुलाल अबीर लगा 

माथे चौडी़ सी बिंदिया

अब के ऐसी होली कर 

उड जाऐ मेरी निंदिया


इंन्द्रधनुष बना रंगों का

उतार दे मेरे अंगों पर

सात जनम जो लिखा रहे 

तेरा नाम प्यार के रंगों पर


भागूंगी न मैं बचने को

तू रंग दे मुझे पकड़ के

नश नश में भर दे प्यार

बाहों में मुझे जकड़ के।


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