STORYMIRROR

ARVIND KUMAR SINGH

Inspirational

4  

ARVIND KUMAR SINGH

Inspirational

क्‍या मौत हमारी आई है?

क्‍या मौत हमारी आई है?

1 min
207


धधक रही हर दिल में ज्‍वाला

उर अन्‍तर धुन्‍धलाये हैं

ये कैसा उजियारा छाया

लहू से दीप जलाऐ हैं


कहीं पे शोले, कहीं पे लपटें

कहीं मचा हुआ कुहराम

मरने वाले पुकार रहे हैं

अल्‍लाह, ईशु, नानक, राम


मानव रक्‍त में ऐसी गर्मी

देव, असुर भी शरमाऐ हैं

भाई के लहू का प्‍यासा भाई

मूढ़, आपस में भरमाऐ हैं


भारत मां हम सबकी एक

क्या इसे बांटना होगा नेक

जो पागल नहीं हुऐ हम क्‍यों

फिर धर्म-जाति के भेद अनेक?


सिसकती देखी स्तब्ध भावना

घड़ी मिलकर रहने की आई है

फिर भी हम सब बंटना चाहें

क्‍या मौत हमारी आई हे?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational