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ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Romance Fantasy


4.5  

ARVIND KUMAR SINGH

Abstract Romance Fantasy


प्रेम कहानी

प्रेम कहानी

1 min 200 1 min 200

मेरे अरमानों की बदली तुम

मुझ पर ही बरसो मैं चाहूंगा

घनघोर घटाओ संग फिर

मैं बन पानी बह जाऊंगा


बन के आग जो बरसोगे

तो शोला मैं बन जाऊंगा

समेट अपने पहलू तेरी

तपिश भी सह जाऊंगा


शबनम की बूंदों जैसे

तुम जब जब बरसोगे

मेरे आगोश की ठंडक

को ही हरदम तरसोगे


बन बदरिया एक बार

मेरे आंगन जो बरसोगे

बार बार फिर पाने को

मुझे ही हरदम तरसोगे


सौ जन्मों के साथी बन

दुनिया को चलो बता जाएं

लिख के प्रेम कहानी अपनी

एक दूजे में समा जाएं


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