सन्नाटा
सन्नाटा
कुछ पंछी दिख जाते हैं
पंख पसारे,
आसमाँ की बुलंदी को
चूमने की चाहत लिये
इस सन्नाटे में../१.
कुछ पंछी दिखते हैं
इत उत फुदकते
चहचहाते
दाने की खोज में...!
शायद..
कुछ विस्मित से
किसी छज्जे की ओर
तकते हुए
सन्नाटे को चीरने वाली
कोई ध्वनि
कोई कंकर
संसनाते हुए आये
और
इक हलचल सी हो
इस सन्नाटे में.. /
पर...!
सोचती हूँ
ये ख़ामोशी
ये सन्नाटा है कहाँ?
गौर से सुनो
इसमें भी इक शब्द है..!
किसी की सिसकी
किसी की चीख
किसी की तड़प
कुछ थमती साँसे
ज़िन्दगी कि चाह में
मौत के मुह से ना...
निकलने को
छटपटाते लोग
और.. इन सब के लिये
संघर्ष करता हुआ
सबको अपने आप में समेटे हुए
मेरा यह देश!!
ये सन्नाटा अकेला कहाँ है..???
