Aishani Aishani
Action Fantasy
शिखर पर जा कर
कहीं अभिमान ना आ जाए
कदम कहीं डगमगा गये तो...?
फिर क्या करूँगी
कहाँ जाऊँगी..?
इसलिए...
सिफ़र पर हूँ
रहने दो
अभिमान रहित होकर
चलने का हुनर
सीखती तो रहूँगी..
हूँ..!!
तुम सूरज सा ब...
रूप का चाँद.....
लिखना चाहती ह...
भूल गई हूँ..!...
धारा के विरुद...
तुम्हारी पसन्...
शिखर..!
सुनो राम..!
उसने ख़ुद को ...
नहीं बदलूँगी....
आँसू नहीं आँखों से, लहू गिरते हैं। आँसू नहीं आँखों से, लहू गिरते हैं।
क्योंकि दोनों ही गुनहगार होते हैं। दूसरों की जय से पहले अपनी जय करो। क्योंकि दोनों ही गुनहगार होते हैं। दूसरों की जय से पहले अपनी जय करो।
बूढ़े बूढी का करो सम्मान हवेली ना बना कर बनाओ एक परिवार। बूढ़े बूढी का करो सम्मान हवेली ना बना कर बनाओ एक परिवार।
मानव अपने जीवन काल में, बहुत कुछ अच्छा कर सकता है मानव अपने जीवन काल में, बहुत कुछ अच्छा कर सकता है
मैं रुका नहीं मैं झुका नहीं, ना तिलक मिटा कभी मेरे भाल से। मैं रुका नहीं मैं झुका नहीं, ना तिलक मिटा कभी मेरे भाल से।
शर्म का घूंघट हटाकर करते रहो तुम अपना काम शर्म का घूंघट हटाकर करते रहो तुम अपना काम
जिसे देख आँखों में आँसू की जगह दिल के ज़ख़्मों से निकले लहू बहते है जिसे देख आँखों में आँसू की जगह दिल के ज़ख़्मों से निकले लहू बहते है
हो जाओ निष्ठुर विरुद्ध उनके, खींचे जो तुझे तनिक भी स्वयं के आडंबर से ।। हो जाओ निष्ठुर विरुद्ध उनके, खींचे जो तुझे तनिक भी स्वयं के आडंबर से ।।
होकर परे साकार अंतहीन युगों से हर अंतराल पर मिलने क्षितिज पर आता। होकर परे साकार अंतहीन युगों से हर अंतराल पर मिलने क्षितिज पर आता।
गिल्ली बनकर वोट का डण्डा नचायेगा नेता को समझा जन-जन ! गिल्ली बनकर वोट का डण्डा नचायेगा नेता को समझा जन-जन !
मंजिल को पाना था ठान लिया था मन में मंजिल को पाना था ठान लिया था मन में
आप अपने प्रखर बुद्धिमत्ता से भारत की कोकिला कहलाई थी आप अपने प्रखर बुद्धिमत्ता से भारत की कोकिला कहलाई थी
क्या जरूरत है एक ही दिल में हजारों को रखने की क्या जरूरत है एक ही दिल में हजारों को रखने की
और साथ में अपने पुराने दोस्तों के साथ इंद्रधनुष देख तेरे बिताए हुए खुशी के पल याद कर और साथ में अपने पुराने दोस्तों के साथ इंद्रधनुष देख तेरे बिताए हुए खुशी के प...
वो भी तो पूरा नहीं प्रेम खुद में ही अधूरा निकला...! वो भी तो पूरा नहीं प्रेम खुद में ही अधूरा निकला...!
मोह माया में घिर गए है बदल दिए किस्मत का खेल। मोह माया में घिर गए है बदल दिए किस्मत का खेल।
जो हम मिलकर सोचा करते थे उसे तुम कभी बदलना नहीं जो हम मिलकर सोचा करते थे उसे तुम कभी बदलना नहीं
जिस्म के पीछे पागल है सारा आलम, मुझे तो सिर्फ प्यार की दीवानी चाहिए। जिस्म के पीछे पागल है सारा आलम, मुझे तो सिर्फ प्यार की दीवानी चाहिए।
कसक रही ये उम्रभर, कि कुछ तो कभी हो मन का, कसक रही ये उम्रभर, कि कुछ तो कभी हो मन का,
आत्मविश्वास बढ़ता है, आगे बढ़ने की इच्छा जागृत होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है, आगे बढ़ने की इच्छा जागृत होती है।