Aishani Aishani
Action Fantasy
शिखर पर जा कर
कहीं अभिमान ना आ जाए
कदम कहीं डगमगा गये तो...?
फिर क्या करूँगी
कहाँ जाऊँगी..?
इसलिए...
सिफ़र पर हूँ
रहने दो
अभिमान रहित होकर
चलने का हुनर
सीखती तो रहूँगी..
हूँ..!!
केवल आप ही पा...
तुम सूरज सा ब...
रूप का चाँद.....
लिखना चाहती ह...
भूल गई हूँ..!...
धारा के विरुद...
तुम्हारी पसन्...
शिखर..!
सुनो राम..!
उसने ख़ुद को ...
फिर कुछ और पता नहीं फिर कुछ और पता नहीं
तेरी कोशिश लाएगी रंग और तुझे जीवन में सफल भी कर देगी। तेरी कोशिश लाएगी रंग और तुझे जीवन में सफल भी कर देगी।
हर कोने से बस केवल विश्वास की लौ जलाते जाना है...! हर कोने से बस केवल विश्वास की लौ जलाते जाना है...!
इस क़दर आप अपने सफरनामा लिखा करते हैं. इस क़दर आप अपने सफरनामा लिखा करते हैं.
अंग-संग मेरे रहते हो तुम ही मुझको भाये अंग-संग मेरे रहते हो तुम ही मुझको भाये
चादर ओढ़े ख्वाब सजाये, जतन पूरे ही कर डाले। चादर ओढ़े ख्वाब सजाये, जतन पूरे ही कर डाले।
उपवन निखर गये है हवा का शोर उपवन निखर गये है हवा का शोर
सड़क पर सावधान होकर हम चलेंगे सड़क पर सावधान होकर हम चलेंगे
ये दुनिया आपको अपने कर्मों के द्वारा ही याद रखेगी ये दुनिया आपको अपने कर्मों के द्वारा ही याद रखेगी
देश को आजाद करके ही दम लिया भले ही लोगों ने उन पर कितना भी सितम किया। देश को आजाद करके ही दम लिया भले ही लोगों ने उन पर कितना भी सितम किया।
नायक वह होता है जो हमें कुछ न कुछ सिखाता है नायक वह होता है जो हमें कुछ न कुछ सिखाता है
मानसिक हो या शारीरिक कोई रोग उसके पास फटकता ही नहीं। मानसिक हो या शारीरिक कोई रोग उसके पास फटकता ही नहीं।
अनुशासित व्यक्ति का हर कार्य समय पर ही होता है। अनुशासित व्यक्ति का हर कार्य समय पर ही होता है।
महिमा भोलेनाथ की, जाने जगत जहान। महिमा भोलेनाथ की, जाने जगत जहान।
ऋतु के हिसाब से जो उपजे उसको ना खाकर स्वाद के हिसाब से ही है कुछ भी खाते। ऋतु के हिसाब से जो उपजे उसको ना खाकर स्वाद के हिसाब से ही है कुछ भी खाते।
कुछ छाप तू छोड़ यूं जिन्दगी पर की कोई तुझे कभी भूल ना पाए कुछ छाप तू छोड़ यूं जिन्दगी पर की कोई तुझे कभी भूल ना पाए
मेहनत से कोई बहाना नहीं जब फल भी अपना तुम्हारा है मेहनत से कोई बहाना नहीं जब फल भी अपना तुम्हारा है
मौसम और जीव-जंतु से लड़ कर बचाता ये फसल है मौसम और जीव-जंतु से लड़ कर बचाता ये फसल है
अब तो समझ पीड़ा इस मन की तेरे अलावा ना कोई सहारा महादेव। अब तो समझ पीड़ा इस मन की तेरे अलावा ना कोई सहारा महादेव।
जब से पिताजी छोड़कर गये उन्हें, कितनी अकेली- अकेली- सी रहती हैं वो , जब से पिताजी छोड़कर गये उन्हें, कितनी अकेली- अकेली- सी रहती हैं वो ,