Aishani Aishani
Tragedy
कुछ टूटे फूटे
कुछ अधूरे
अक्षर निर्मित शब्द
भेज रही हूँ
तुम्हारे पास
इन्हें जोड़कर
अपनी इबादत के लिए
इक महल बनवा लेना
क्यूँकि...
वो तुमको पसंद है
वो
मैं हूँ नहीं
और..
जो मैं हूँ
वो तुमको...! ¡
तुम सूरज सा ब...
रूप का चाँद.....
लिखना चाहती ह...
भूल गई हूँ..!...
धारा के विरुद...
तुम्हारी पसन्...
शिखर..!
सुनो राम..!
उसने ख़ुद को ...
नहीं बदलूँगी....
चूल्हा रोटी औऱ हाथ के छाले उम्र हो चली औऱ हो गये सफ़ेद बाल सारे! चूल्हा रोटी औऱ हाथ के छाले उम्र हो चली औऱ हो गये सफ़ेद बाल सारे!
मानव अधिकार कानून की कतारें कागज़ पर ही रह जाएगी। मानव अधिकार कानून की कतारें कागज़ पर ही रह जाएगी।
नहीं तो बहने दो पसीना मेरा मजदूरी पर ना मेरी तुम घात लगाओ। नहीं तो बहने दो पसीना मेरा मजदूरी पर ना मेरी तुम घात लगाओ।
मन की गति को कौन जानेगा , कुछ भी कह लो कौन मानेगा ? मन की गति को कौन जानेगा , कुछ भी कह लो कौन मानेगा ?
ये गमों की रातें भी बड़ी बेअदब थीं जो निरंतर लंबी होती जा रही थीं। ये गमों की रातें भी बड़ी बेअदब थीं जो निरंतर लंबी होती जा रही थीं।
तुझ बिन ये जिंदगी बेमतलब सी लगती है बेमतलब सी लगती है। तुझ बिन ये जिंदगी बेमतलब सी लगती है बेमतलब सी लगती है।
एक माँ के चेहरे पे मैंने ये सवाल देखा पहली बार जब मैंने अस्पताल देखा एक माँ के चेहरे पे मैंने ये सवाल देखा पहली बार जब मैंने अस्पताल देखा
खून पसीने बहाकर रोटी, वह अपनो के लिए ही कमाता है। खून पसीने बहाकर रोटी, वह अपनो के लिए ही कमाता है।
हर जरूरत पूरी करती है, प्रकृति फिर क्यों, प्रकृति के विरुद्ध ही काम जारी है। हर जरूरत पूरी करती है, प्रकृति फिर क्यों, प्रकृति के विरुद्ध ही काम जारी है।
होगा जो ठनठन गोपाल तो अर्थी भी तेरी आम सी होगी। होगा जो ठनठन गोपाल तो अर्थी भी तेरी आम सी होगी।
जितना गहराई में चलते जाओगे उतना मुझसे रूबरू होते जाओगे। जितना गहराई में चलते जाओगे उतना मुझसे रूबरू होते जाओगे।
कोई नहीं शायद बे-पर्दा पहचानता तुम्हें फिर अलग की ग़ज़लों से क्यूँ बुलातें हैं। कोई नहीं शायद बे-पर्दा पहचानता तुम्हें फिर अलग की ग़ज़लों से क्यूँ बुलातें ह...
अनसुनी करते बह गया वक्त अधूरी तमन्ना से क्या ज़िंदगी सजे। अनसुनी करते बह गया वक्त अधूरी तमन्ना से क्या ज़िंदगी सजे।
क़र्ज़ में डूब उगाए, सही मोल न पाए, अब और परेशान है, क़र्ज़ में डूब उगाए, सही मोल न पाए, अब और परेशान है,
भेदभाव चीखता तेरे अहम् में गुरुर लाजमी-सा मिलता है ! फर्क तो जरूर मिलता है। भेदभाव चीखता तेरे अहम् में गुरुर लाजमी-सा मिलता है ! फर्क तो जरूर मिलता...
सपनों के सौदागरों को शायद इस देश की मिट्टी नहीं जँचती है। सपनों के सौदागरों को शायद इस देश की मिट्टी नहीं जँचती है।
कुछ हैं सम्मान का अभाव कुछ विचारों का टकराव। कुछ हैं सम्मान का अभाव कुछ विचारों का टकराव।
के लिए फिर कोख कहाँ से लाओगे ? फिर कोख कहाँ से लाओगे ? के लिए फिर कोख कहाँ से लाओगे ? फिर कोख कहाँ से लाओगे ?
छोटी बेटी का भी दिल से स्वागत ओर सम्मान करो ! छोटी बेटी का भी दिल से स्वागत ओर सम्मान करो !
उसका जीवन दुख और अपमान की वीर-गाथा है। संघर्ष और बलिदान से भरी एक दुखद कथा है। उसका जीवन दुख और अपमान की वीर-गाथा है। संघर्ष और बलिदान से भरी एक दुखद कथा है...