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Aishani Aishani

Tragedy

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Aishani Aishani

Tragedy

तुम्हारी पसन्द...!

तुम्हारी पसन्द...!

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कुछ टूटे फूटे

कुछ अधूरे

अक्षर निर्मित शब्द

भेज रही हूँ

तुम्हारे पास

इन्हें जोड़कर

अपनी इबादत के लिए

इक महल बनवा लेना

क्यूँकि...

वो तुमको पसंद है

वो 

मैं हूँ नहीं

और.. 

जो मैं हूँ

वो तुमको...! ¡



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