STORYMIRROR

Priyadarsini Das.

Tragedy

4  

Priyadarsini Das.

Tragedy

मां

मां

1 min
286

तुझको खोने के बाद तू ज्यादा याद आती है

जब भी अकेले होती हूं 

सिर्फ तेरी नाम जवान पे होती है


तुझ बिन ये ज़ींदेगी

मानो बेमतलब लगती है।


जब भी दिल दुखता है

तेरी वो आंचल याद आती है

सर्द हो या गर्मी के मौसम में

सिर्फ तू ही याद आती है।


चोट आने पर तेरी नाम याद आती है

सपने पूरे होने पर भी

तेरी याद साथ होती है।


तुझ बिन ये ज़िंदेगि

मानो नर्क जैसी लगती है

अगर तो होती तो 

ये कोई स्वर्ग की तरह लगती थी।


आज में अकेली हूं

भीड़ से दूर कहीं खड़ी हूं


अनजान सहर पर कहीं खो गई हूं

हर पल सिर्फ तुझे हीं पुकारती हूं।


तू जाने के वाद तू ज्यादा याद आती है

तुझ बिन ये जिंदगी बेमतलब

सी लगती है

बेमतलब सी लगती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy