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Priyadarsini Das.

Tragedy


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Priyadarsini Das.

Tragedy


क्या बोलूं

क्या बोलूं

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उसने इतना मुझे रुला दिया ,

क्या बोलूं ....?

प्यार से भरोसा है उठा दिया .....।


चांद तारों की बातें करके 

इसी जमीन पर छोड़ दिया ,


क्या बोलूं ....?


प्यार से भरोसा ही उठा दिया ....,

उसने इतना मुझे रुला दिया .....।


जो हाथ कभी उसके लिए दुआ करती थी ,

आज भी करते है .....,

भले उसने दगा दिया , 

पर मैंने नहीं दिया......।


क्या बोलूं ....?

उसने इतना मुझे रुला दिया ,

ऐतवार से भरोसा ही उठा दिया ...।


कितनी रातें जगा कर ,

प्यार की बातें करके ,

आज आंखों से नीद हीं चोरा लिया ......

क्या बोलूं ....?


उसने इतना मुझे रुला दिया ,

इस्क से भरोसा ही उठा दिया .....।


मुझे अकेला ना छोड़ रे वादे करने वाले ,

आज बीच राहों में अकेला कर दिया .....


क्या बोलूं ....?

उसने इतना मुझे रुला दिया ,

प्यार से भरोसा ही उठा दिया .....।


उसने इतना मुझे रुला दिया ,

क्या करूं .....?


फिर भी ये दिल उसके लिए दुआ करे ,

उसकी खुशी की फरियाद करे ,

ना जाने कितने मन्नते करें......।


क्या बोलूं ....?


जीवन में रोशनी भरने की वादे करके ,

उसने चारो और अंधेरा ही भर दिया ...,


क्या बोलूं,


उसने इतना मुझे रुला दिया ,

प्यार से भरोसा ही उठा दिया ....।


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