STORYMIRROR

Priyadarsini Das.

Tragedy

4  

Priyadarsini Das.

Tragedy

तनहा

तनहा

1 min
469

कल भी मैं तनहा थी 

आज भी तनहा हूं ....


बस फर्क इतना ही है कि 

कल तनहा में 

तेरे कोई याद नहीं था ...।


पर आज जब तनहा हूं

तब तेरे याद 

मुझे जीने नहीं देते ......।


हर पल कहीं दूर 

तू खड़ी नज़र आता है ,

पर जब पास जाओ 

तो तू नहीं 

बस तेरा खयाल होता है .....।


पता नहीं 

क्यों हूं में इतनी 

लाचार ....

क्यों तेरे याद 

मुझे इतने बेबस बना देता है ....।


क्यों तेरे बिना 

एक पल के भी 

जीना इतनी मुश्किल होता है ...।


कल भी तनहा थी 

आज भी तनहा हूं ....।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy