STORYMIRROR

Anupama Gupta

Tragedy Inspirational

3  

Anupama Gupta

Tragedy Inspirational

साठ पार

साठ पार

1 min
229

कुछ रोज पहले ही

हुआ हूँ 

सेवानिवृत्त !

पैंतीस बरस का सपना 

था यह दिन 

जिसे जीने की

चाह लिए 

पैंतीस बरस गुजार दिए 

लेकिन बस

चंद दिनों में 

ऊब गया हूँ 

इस जीवन से 

सोचता हूँ 

सपनों का 

सपनों में रहना 

जितना खुशनुमा है 

उनका 

वास्तविकता में बदलना 

उतना ही 

दुखदायी !



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy