Anupama Gupta
Tragedy Classics Inspirational
कुछ लोग
और
कई बातें
जो मन को
अक्सर तोड़
देती है !
सीखें छोड़ देना
वहीं पर उसे
जन्मी थी
जहाँ से वह
साथ ढ़ोकर उन्हें
लादकर
मन पर
इतना बोझ !
क्या अन्याय नहीं
ए
मन की मासूमियत पर ?
शुरुआत
अस्पष्टता
गर्मी की छुट्...
मानवता
साठ पार
कब कौन
गुफ्तगू
गृहस्थी में ख...
गणतंत्र
हाँ हूं मैं 'मोहब्बत' हाँ हूं मैं 'औरत' सिर्फ़ हरायी गयी हूं ! हाँ हूं मैं 'मोहब्बत' हाँ हूं मैं 'औरत' सिर्फ़ हरायी गयी हूं !
हर रात को हमने भी पिया है पिया तेरी याद का सुनहरा वो जाम। हर रात को हमने भी पिया है पिया तेरी याद का सुनहरा वो जाम।
धागा, खुशियों का उलझ गया लगता है, सब झुलस गया। धागा, खुशियों का उलझ गया लगता है, सब झुलस गया।
आरक्षण को दफ़्न करने की ज़मीन खोदते हैं। आरक्षण को दफ़्न करने की ज़मीन खोदते हैं।
मैं न तेरा अभिमान बना आज फ़िर असफल रहा। मैं न तेरा अभिमान बना आज फ़िर असफल रहा।
उसकी डोली उसकी डोली
उन सभी बलात्कारियों को फांसी पर लटका दे। उन सभी बलात्कारियों को फांसी पर लटका दे।
सर्द सर्द रातों में अकसर बिस्तर में यूं जिस्म को कसकर आंखों में अश्कों को मसलकर यादों के कुएं में... सर्द सर्द रातों में अकसर बिस्तर में यूं जिस्म को कसकर आंखों में अश्कों को मसलक...
यह कैसा लोकतंत्र हमारा ? और यह कैसे आजादी हमने पायी हैं। यह कैसा लोकतंत्र हमारा ? और यह कैसे आजादी हमने पायी हैं।
चांदनी को बिखेरेगा अपने इस उजड़ते वीरान, परेशान गांव को पहले की तरह। चांदनी को बिखेरेगा अपने इस उजड़ते वीरान, परेशान गांव को पहले की तरह।
कैसी ये इंसानियत तूने बनाई है कि आज इंसान ही इंसान को मार रहा है। कैसी ये इंसानियत तूने बनाई है कि आज इंसान ही इंसान को मार रहा है।
साथ देंगे एक दूसरे का अब हम, करे नई शुरुआत। साथ देंगे एक दूसरे का अब हम, करे नई शुरुआत।
तभी चिल्लाने की आवाज आई- छोटू जल्दी से चाय ला। तभी चिल्लाने की आवाज आई- छोटू जल्दी से चाय ला।
कितने संसाधनों को खो चुके मेरी नज़र में साल 2040 कुछ ऐसा होगा। कितने संसाधनों को खो चुके मेरी नज़र में साल 2040 कुछ ऐसा होगा।
वादों की डोलियां ऊठी थी कभी आज उनके जनाजों की कतार भी देख ली। वादों की डोलियां ऊठी थी कभी आज उनके जनाजों की कतार भी देख ली।
भेजें थे मैंने इन्सान कैसे हो गये शैतान। भेजें थे मैंने इन्सान कैसे हो गये शैतान।
चुकानी पड़ती है क्या लोकलाज हमें अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यारी है। चुकानी पड़ती है क्या लोकलाज हमें अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यारी है।
तन-मन भर जाएंगे सब उभरेंगे दर्द के जज्बात। तन-मन भर जाएंगे सब उभरेंगे दर्द के जज्बात।
एक जिन्दा लाश ही मेरा जीवन रह गया है। एक जिन्दा लाश ही मेरा जीवन रह गया है।
हम भी क्या इनकी हिफ़ाज़त के लिये यूँ ही शहीद हो जाते हैं। हम भी क्या इनकी हिफ़ाज़त के लिये यूँ ही शहीद हो जाते हैं।